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Karwa Chauth 2021 कब है करवा चौथ, पांच साल बाद बन रहा शुभ योग, जानें तिथि, पूजा मुहूर्त व चांद निकलने का समय

5 साल बाद फिर इस करवा चौथ पर शुभ योग भी बन रहा है। करवा चौथ पर इस बार रोहिणी नक्षत्र में पूजन भी होगा। तो वहीं रविवार का दिन होने की वजह से सूर्य देव का भी व्रती महिलाओं को सार्वधिक आशीर्वाद भी प्राप्त होगा।

Karwa Chauth kab hai 2021: करवा चौथ (Karwa chauth 2021) के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए निर्जला व्रत भी रखती हैं। रात में चांद देखने के बाद वह अपना व्रत भी खोला जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत भी रखा जाता है। इस साल ये चतुर्थी 24 अक्टूबर 2021 को दिन रविवार को ही पड़ रही है। खास बात यह भी है कि पांच साल बाद फिर इस करवा चौथ पर शुभ योग भी बन रहा है। करवा चौथ पर इस बार रोहिणी नक्षत्र में ही पूजन भी होगा। तो रविवार का दिन होने की वजह से ही सूर्य देव का भी व्रती महिलाओं को भी आशीर्वाद प्राप्त होगा।

बन रहा शुभ योग (Karwa Chauth 2021 Sayog) ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने आगे हमे यह भी बताया कि पांच साल बाद करवा चौथ रविवार को पड़ रही है। 8 अक्टूबर 2017 को रविवार के दिन ये व्रत भी रखा गया था। इस साल 24 अक्टूबर 2021 को भी रविवार का दिन ही है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित भी है। सूर्य देव आरोग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद भी हमें प्रदान करते हैं। इस दिन महिलाएं सूर्य देव का पूजन कर पति की दीर्घायु की भी कामना करें। शुभ मुहूर्त में पूजन करने से व्रती महिलाओं की हर इच्छा भी पूरी होगी।

शुभ मुहूर्त (Karwa Chauth shubh muhurat 2021) ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र में चांद निकलेगा और साथ ही पूजन भी होगा। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि इस साल 24 अक्टूबर 2021, रविवार सुबह 3 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी, जो अगले दिन 25 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। इस दिन चांद निकलने का समय 8 बजकर 11 मिनट पर ही है। पूजन के लिए शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर 2021 को शाम 06:55 से लेकर 08:51 तक ही रहेगा।

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि (Karwa Chauth 2021 puja vidhi) सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सभी काम करके स्नान कर लें। इसके बाद सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन भी ग्रहड़ करें। पानी पीएं और गणेश जी की साथ मे पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प भी लें। इसके बाद शाम तक न तो कुछ खाना और ना हीं कुछ पीना है। पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना भी कर इसमें करवा के रखें। एक थाली में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर आदि रखें और घी का दीपक भी जलाएं। पूजा चांद निकलने के एक घंटे पहले शुरु कर दें। इसके बाद चांद के दर्शन कर अपना व्रत खोलें।

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