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18-19 को सदी का सबसे लंबा आंशिक चंद्रगहण, 580 साल बाद ऐसा मौका

इस सदी का सबसे ज्यादा लंबा आंशिक चंद्रग्रहण (Longest Partial Lunar Eclipse) 18-19 नवंबर को दिखाई ददेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अमेरिका के 50 राज्यों मे भी दिखाई देगा। इतना लंबा चंद्रग्रहण 580 सालों के बाद ही हो रहा है। इसलिए दुनियाभर के वैज्ञानिक इस नजारे को अपने कैमरे में भी दर्ज करने के लिए तैयार बैठे हैं। यह आंशिक चंद्र ग्रहण 3 घंटे, 28 मिनट और 23 सेकेंड लंबा भी होगा।

इस सदी का सबसे लंबा आंशिक चंद्रग्रहण (Longest Partial Lunar Eclipse) 18-19 नवंबर को ही दिखाई देगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अमेरिका के 50 राज्यों में भी दिखाई देगा। इतना लंबा चंद्रग्रहण 580 सालों के बाद हो रहा है. इसलिए दुनियाभर के वैज्ञानिक इस नजारे को अपने कैमरे में दर्ज करने के लिए तैयार ही बैठे हैं। यह आंशिक चंद्र ग्रहण 3 घंटे, 28 मिनट और 23 सेकेंड लंबा भी होगा।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अनुसार यह 580 साल के बाद इतना लंबा चंद्र ग्रहण हो भी रहा है। लेकिन जिस समय अमेरिका में लोग चंद्र ग्रहण देख रहे होंगे, उस समय भारत के लोग दिन में अपना काम भी कर रहे होंगे। इस चंद्र ग्रहण को द माइक्रो बीवर मून (The Micro Beaver Moon) भी कहते हैं। क्योंकि यह धरती से अधिकतम दूरी पर भी रहता है। इसी समय में अमेरिका में ऊदबिलावों यानी बीवर को भी पकड़ा जाता है। इसलिए इसका नाम कुछ इस तरह से भी रखा गया है।

इंडियाना के बटलर यूनिवर्सिटी स्थित होलकॉम्ब ऑब्जरवेटरी के मुताबिक आंशिक चंद्रग्रहण (Partial Lunar Eclipse) का मतलब यह होता है कि जब धरती की परछाई चांद के सिर्फ 97 फीसदी  हिस्से को कवर ही करे। यह इस सदी का सबसे लंबा आंशिक चंद्रग्रहण भी होगा। इससे पहले साल 2018 में एक घंटे और 43 मिनट का चंद्रग्रहण ही लगा थथा।जबकि, इस बार होने वाला चंद्रग्रहण 3 घंटे 28 मिनट और 23 सेकेंड लंबा होगा। ऐसी घटना 580 साल के बाद ही देखने को मिल रहा है।

चंद्रग्रहण तब होता है जब सूरज और चांद के बीच धरती आ जाती है और धरती की परछाई की वजह से चांद की रोशनी जमीन पर बिल्कुल नहीं दिखती। धरती की परछाई पूरे चांद को भी कवर कर सकती है। फिर आंशिक रूप से यह कवर करती है। जिससे कई बार चांद लाल रंग का भी दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सूरज की रोशनी धरती की परछाई के गहरे हिस्से से सीधे नहीं टकराती. वह मुड़कर हमारे वायुमंडल से होकर गुजरती है. जैसे ही लाल और नारंगी वेवलेंथ धरती के वायुमंडल से गुजरता है तो वह महोगनी लाल रंग पैदा करता है, जिससे चांद लाल दिखाई देता है. 

इस चंद्र ग्रहण को उत्तरी अमेरिका, प्रशांत महासागर के द्वीप और देश, अलास्का, पश्चिमी यूरोप, पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान के लोग देख पाएंगे. इस चंद्रग्रहण का शुरुआती हिस्सा यानी चांद के उगने के समय थोड़ा सा नजारा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी दिखाई देगा. वहीं, दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के लोग चंद्रग्रहण का उच्चतम स्तर देख सकेंगे। बुरी बात ये है कि अफ्रीका, मध्य-पूर्व और पश्चिमी एशिया से यह दुर्लभ चंद्रग्रहण नहीं दिखाई देगा. इसके बाद अगला पूर्ण चंद्रग्रहण 15-16 मई 2022 को होगा. उसके बाद एक और पूर्ण चंद्रग्रहण 7-8 नवंबर को होगा. जिसे कई देशों के लोग देख सकेंगे लेकिन इसके समय समेत अन्य जानकारियों को साझा नहीं किया गया है।

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