प्रेमसुख डेलू ने IPS बनने से पहले 12 परीक्षाओं में किया था पास, संघर्ष भरी कहानी

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कॉलेज में लेक्चरर के पद पर काम करते हुए प्रेमसुख ने साल 2014 में पहली बार UPSC की परीक्षा दी थी। उन्हें ऑल इंडिया में 170वीं रैंक के साथ IPS का पद मिला था।

यूपीएससी जैसी परीक्षा की तैयारी करने वाले कई छात्रों को एक परीक्षा पास करने में कई साल लग जाते हैं। वहीं प्रेमसुख डेलू (IPS Officer Premsukh Delu) का नाम ऐसे छात्रों में लिया जाता है जिनकी कहानी सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायी है. प्रेमसुख को एक-दो नहीं बल्कि 12 बार सरकारी नौकरी मिली है। यहां देखिए उनकी सफलता की कहानी।

यूपीएससी जैसी परीक्षा की तैयारी करने वाले कई छात्रों को एक परीक्षा पास करने में कई साल लग जाते हैं। वहीं प्रेमसुख डेलू (IPS Officer Premsukh Delu) का नाम ऐसे छात्रों में लिया जाता है जिनकी कहानी सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायी है. प्रेमसुख को एक-दो नहीं बल्कि 12 बार सरकारी नौकरी मिली है। यहां देखिए उनकी सफलता की कहानी।

एक प्रतिभाशाली प्रतिभा का जन्म 3 अप्रैल 1988 को राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा तहसील के रासीसर गांव के देलु परिवार में हुआ था। उनके पिता खेती करते हैं। प्रेमसुख 4 भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनके पिता ऊंट गाड़ी चलाकर लोगों का सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करते थे।

प्रेमसुख डेलू ने अपने ही गांव के सरकारी स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने सरकारी डूंगर कॉलेज, बीकानेर से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। यहीं से उन्होंने इतिहास में एमए किया और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। इसके साथ ही उन्होंने इतिहास में यूजीसी-नेट और जेआरएफ की परीक्षा भी पास की।

प्रेम बचपन से ही सरकारी अफसर बनकर अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने की सोचता था। इसके लिए उनका पूरा फोकस सिर्फ पढ़ाई पर था। प्रेमसुख वर्ष 2010 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली बार प्रतियोगी परीक्षा में बैठे। उन्होंने पटवारी की भर्ती के लिए आवेदन किया और उसमें सफल हुए।

पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रेमसुख डेलू ने राजस्थान ग्राम सेवक की परीक्षा दी, जिसमें उसने दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद वे सहायक जेलर की परीक्षा में बैठे और पूरे राजस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त किया। जेलर के पद पर आने से पहले ही सब-इंस्पेक्टर की परीक्षा का रिजल्ट भी आ गया था और उसमें भी उनका चयन हो गया था.

इसके बाद उन्हें कॉलेज में लेक्चरर का पद मिला। इस दौरान उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला किया। उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी, जहाँ उनका चयन तहसीलदार के पद के लिए हुआ और प्रेमसुख ने तहसीलदार के पद पर कार्यभार ग्रहण किया। यहीं से उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की।

साल 2014 में वह पहली बार यूपीएससी की परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। जिसके बाद वह 2015 में फिर से इस परीक्षा में बैठे। अपने दूसरे प्रयास में, उन्होंने यूपीएससी परीक्षा को क्रैक किया। उन्हें ऑल इंडिया में 170वीं रैंक के साथ आईपीएस का पद मिला था। उन्हें गुजरात कैडर मिला और उनकी पहली पोस्टिंग गुजरात के अमरेली में एसीपी के पद पर हुई थी।

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