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मेहनत ने बनाया तुषार को जज, पढ़ें सफलता की कहानी

कहते हैं इंसान की मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। कभी-कभी इसका फल भी मिलता है। कानपुर के लाल बंगले के तुषार जायसवाल का संघर्ष इन पंक्तियों पर एकदम सटीक बैठता है। तुषार 17 साल से लगातार सिविल सर्विसेज के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे।


कई बार वह मेन्स और इंटरव्यू में पहुंचे लेकिन हर बार असफल रहे। तुषार ने हार नहीं मानी और मेहनत करते रहे। उनका चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के पीसीएस-जे 2018 में हुआ। अब वे सिविल जज बन गए हैं।

ग्रेजुएशन के बाद शुरू की सिविल की तैयारी
तुषार का कहना है कि उन्होंने 1997 में जयपुरिया स्कूल से 10वीं और 1999 में 12वीं पास की। इसके बाद उन्होंने 2002 में पीपीएन कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की। तब से उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी। कई बार प्री-क्वालिफाई करने के बाद वह मेन्स और फिर इंटरव्यू में शामिल हुए, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

वह कई बार निराश भी हुए लेकिन परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया। वह उसी आत्मा के साथ दृढ़ रहना जारी रखा। 2012 में, डीसी लॉ कॉलेज के शिक्षक अनिल भट्ट ने तुषार को कानून की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद तुषार ने पीसीएस-जे की तैयारी शुरू कर दी और आखिरकार सफलता मिल ही गई।


इंटरव्यू के लिए बढ़ाई शादी की तारीख
तुषार का कहना है कि उनकी शादी की तारीख 30-31 जनवरी 2019 तय की गई थी। इसी बीच पीसीएस-जे इंटरव्यू की तारीख आ गई है। इस वजह से उन्हें शादी टालनी पड़ी। तुषार का कहना है कि पिता अशोक जायसवाल, मां कल्याणाली जायसवाल और पत्नी ऋचा जायसवाल ने हमेशा उनकी मदद की। पिता होटल व्यवसायी और माता गृहिणी हैं।

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